• राशि चक्र की प्रथम राशि मेष मानी जाती है। इसके स्वामी मंगल हैं। यह चर (चलित) एवं अग्नितत्त्व प्रधान राशि है, जिसका प्रतीक मेढ़ा संघर्ष, साहस और अग्रसर होने की प्रवृत्ति को दर्शाता है।
• मेष राशि के जातक सामान्यतः आकर्षक व्यक्तित्व वाले होते हैं। स्वभाव में स्पष्टता और कभी-कभी कठोरता दिखाई दे सकती है। ये किसी के दबाव में कार्य करना पसंद नहीं करते।
• इनका चरित्र आदर्शवादी और स्पष्टवादी होता है। समाज में प्रभाव, वर्चस्व एवं मान-सम्मान प्राप्त करने की क्षमता रखते हैं।
• निर्णय लेने में तीव्र होते हैं। जिस कार्य को हाथ में लेते हैं, उसे पूर्ण किए बिना पीछे हटना पसंद नहीं करते।
• स्वभाव में उदारता रहती है। लालच इनकी प्रकृति में कम होता है तथा दूसरों की सहायता करना इन्हें अच्छा लगता है।
• कल्पनाशक्ति प्रबल होती है। अत्यधिक सोचने और भविष्य की योजनाएँ बनाने की प्रवृत्ति रहती है।
• स्वयं जैसे होते हैं, वैसी ही अपेक्षा दूसरों से भी करते हैं। इसी कारण कई बार विश्वासघात या निराशा का सामना करना पड़ता है।
• अग्नितत्त्व प्रधान होने के कारण क्रोध शीघ्र आता है। चुनौतियों को स्वीकार करने और जोखिम लेने की क्षमता अधिक होती है।
• अपमान को जल्दी नहीं भूलते। अवसर मिलने पर प्रतिशोध लेने की भावना भी प्रबल हो सकती है।
• जिद और दृढ़ निश्चय इनके स्वभाव का महत्वपूर्ण भाग है। इनके भीतर एक रचनात्मक एवं कलात्मक पक्ष भी छिपा रहता है।
• बहुमुखी प्रतिभा के धनी होते हैं तथा अनेक कार्यों को सफलतापूर्वक करने की क्षमता रखते हैं। स्वयं को अग्रणी मानने की प्रवृत्ति रहती है।
• अपने अनुसार कार्य करवाने की इच्छा रखते हैं। नेतृत्व क्षमता अधिक होने के कारण कई बार विरोधी भी उत्पन्न हो जाते हैं।
• एक ही कार्य को लंबे समय तक दोहराना पसंद नहीं करते। इन्हें नवीनता और परिवर्तन आकर्षित करते हैं।
• एक स्थान पर लंबे समय तक रहना भी इन्हें पसंद नहीं आता। गतिशील जीवनशैली और नेतृत्वपूर्ण भूमिका में अधिक सफल रहते हैं।
• कम बोलने वाले, हठी, स्वाभिमानी एवं कर्मठ होते हैं। प्रेम संबंधों में संघर्ष का अनुभव हो सकता है, परंतु बुरे कर्मों से बचने का प्रयास करते हैं। तकनीकी, यांत्रिक एवं प्रबंधन संबंधी कार्यों में सफलता प्राप्त कर सकते हैं।